Thursday, May 13, 2010

ख़ुशी का ताज . . .



कभी अपने होठों पे गीतों का,
हम भी साज सा रखते थे !

न थे आँखों में तब आंसू,
ख़ुशी का ताज सा रखते थे !!

तुम जो साथ चलती जिंदगी के तन्हा सफ़र में,
तो देखती कि कोई गम न होता;

क्योंकि हम अपने दिल में,
सिर्फ एक तुम्हें मुमताज सा रखते थे !!

12 comments:

  1. भाई अंकुर,
    नारी को मुमताज बना
    दफ़न न करो I
    नूरजहाँ बना जहाँ को रोशन करो !!!!!!!!
    विनीता

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  2. आपकी बात एकदम पक्की है, विनीता दीदी जी !
    किन्तु यह मेरा विचार था जो मैंने प्रस्तुत किया !
    पर आपका यही प्यार मुझे "मुमताज़" को "नूरजहाँ" बनाने के लिए प्रेरित करता रहेगा !
    आपका सादर धन्यवाद !

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  3. हेल्लो भाई !
    क्या हाल चाल है ?
    आपकी कविता मुझे अच्छी लगी |
    आप युही प्यार को बढ़ाते रहे |
    ये न सोचे कि सामने वाला क्या सोचता है |
    हमें ये नहीं सोचना चाहिए कि सामने वाला मुझसे प्यार करता है या किसी और से |
    हमें यह सोच कर प्यार नहीं करना सामने वाला हमी से प्यार करे क्योकि हम उसे प्यार करते है |
    हमें ये सोचना चाहिये कि हम जिससे प्यार करते है वो हमेशा खुश रहे |
    जिससे प्यार करते है वो जिसमे खुश रहे हमें वो ही करना चाहिए |
    हम जिससे प्यार करते है उसकी ख़ुशी से बढ कर कोई प्यार नहीं होता |

    हमेशा सभी से प्यार करे !

    प्यार बाटने से ही प्यार बढता है |

    धन्यवाद !
    आपका सादर धन्यवाद !

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  4. dil ko banaya taaj aur jabt kiya mumtaaj kee rooh ko
    duniya me amrita imroz bhi misaal hain

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  5. bahut ahcchhe ahsaas likhe hai apne...

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  6. जो मन में आये वो लिखो ...जरूरी नहीं सब उस से सहमत हो ..और वो सच भी हो ये भी आवश्यक नहीं.....आप अपने मन की लिखो ..हम अपने मन की प्रतिक्रियाएं कहे ....तुम हमें समझो ........हम तुम्हे समझे .....ना तुम हमसे नाराज़ हो ........ना हम तुमसे ....बस हम सब का लिखा ...शालीन और किसी के लिए हानिकारक ना हो ...... इसी का नाम ब्लॉग जगत है ....बहुत बढ़िया कविता है आपकी सुन्दर विचारों की अभिव्यक्ति है ....बस इसी तरह लिखते रहे ....एक दिन मंजिल आपके सामने होगी .....बाकी हमारी दुआएं तो साथ में है ही ....बधाई स्वीकारे

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  7. bahut badhiya ! yoo hi likhte rahe.. pyar lutate rahe

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  8. गुड्डोदादीFri May 14, 11:23:00 PM

    प्रसून जी
    टिप्पणी
    श्यामल सुमन जी की टिप्पणी कविता पढ़ें

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