
आज तुमसे मेरे जीवन की, अंतिम बात अब होगी !
न अब काटूँगा दिन तन्हा, न ही ये रात अब होगी !!
मुझे मालूम है, अपना बनाया है कोई तुमने ;
रहते हैं दिल में वो, क्या मेरी औकात अब होगी ?
है फकत ये जिंदगी बस चार ही दिन की जनाब, लाख कोशिश करो न भूलने की ये सामान सारा, पर सब यहीं पर छोड़ के एक दिन तो जाना ही है !! - प्रसून 'अंकुर'

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हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
ReplyDeleteकृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें
अच्छा लगा आपका ब्लॉग .. इस ब्लॉग के साथ आपका हिन्दी ब्लॉग जगत में स्वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!
ReplyDeleteआज तुमसे मेरे जीवन की, अंतिम बात अब होगी
ReplyDelete" कयामत की घड़ी होगी......शायद.."
regards
न अब काटूँगा दिन तन्हा, न ही ये रात अब होगी !!
ReplyDeletekya aisa sach mein hota hai ankur...