
तेरी चाहत में हमने पा ली ये कैसी नयी उलझन ?
कि तेरे प्यार में ही खो गया मेरा कहीं तन-मन !
खुदा भी तेरी हर फ़रियाद जल्दी सुन गया कैसे ?
कि भर झोली तेरी खुशियों से मुझको दे गया तड़पन !!
है फकत ये जिंदगी बस चार ही दिन की जनाब, लाख कोशिश करो न भूलने की ये सामान सारा, पर सब यहीं पर छोड़ के एक दिन तो जाना ही है !! - प्रसून 'अंकुर'
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sunder rachana.
ReplyDeletegood acchi tadap hai:)
ReplyDeletesunder rachna.
ReplyDeleteati utaam... adbhutaas...
ReplyDeleteआप सभी का कोटि-कोटि धन्यवाद !
ReplyDeletelikhte raho bhai. pryaas avashy rang dikhaaye gaa .
ReplyDeletekam shabd aur bahut gahra dard
ReplyDeleteभाई बहुत सुन्दर ब्लॉग है ..रचना बेहद अच्छी लगी .... पृष्ट कलर चेंज करे....एक सुझाव
ReplyDeleteमहेन्द्र मिश्र
कृपया मेरा ब्लॉग देखें
समयचक्र
bahut sundar blog aur rachana ...............
ReplyDeletesabako dushmar bana liya maine aapse dil laga liya maine..................
layout change karen prsoon ji padhne me samsy ho rahi hai.........
ReplyDeleteJi haan Gupta ji ! Main jald hi Layout change karta hoon !
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर लिखा है आपने प्रसून जी!
ReplyDeleteबधाई!साथ ही साथ वर्ड बेरीफ़िकेशन हटा ले तो टिप्पणी देने में सुविधा होगी
सुन्दर । लिखते रहें ।
ReplyDeleteso nice
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